नजीबाबाद के आलोपुर गांव में तेंदुए के हमले में बबीता नाम की महिला की मौत हो गई। ग्रामीणों ने शोर मचाकर तेंदुए को भगाया, जिसके बाद पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
Rahul Gupta
बिजनौर, 10 सितंबर।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में तेंदुए के हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नजीबाबाद थाना क्षेत्र के आलोपुर गांव में तेंदुए ने बबीता नाम की महिला पर हमला कर दिया। तेंदुआ महिला को गर्दन से दबोचकर पास के गन्ने के खेत में खींच ले गया। ग्रामीणों ने शोर मचाकर तेंदुए को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक महिला की मौत हो चुकी थी। घटना के बाद गांव और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है।
गर्दन से दबोचकर गन्ने के खेत में ले गया तेंदुआ
बताया जा रहा है कि बबीता गांव के पास मौजूद थीं। इसी दौरान तेंदुए ने अचानक उन पर हमला कर दिया। तेंदुआ महिला को गर्दन से दबोचकर गन्ने के खेत की ओर खींच ले गया। महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे।
ग्रामीणों ने गन्ने के खेत में घुसकर शोर मचाया और तेंदुए को ललकारा। इसके बाद तेंदुआ महिला को छोड़कर वहां से भाग गया। हालांकि, हमले में बबीता की मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की।
तीन साल में 60 से ज्यादा मौतों का दावा
बिजनौर लंबे समय से मानव-तेंदुआ संघर्ष की समस्या से जूझ रहा है। स्थानीय और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में जिले में तेंदुए के हमलों में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। गन्ने के ऊंचे खेत तेंदुओं के छिपने के लिए सुरक्षित जगह बन गए हैं, जिससे खेतों में काम करने वाले किसान और ग्रामीण लगातार खतरे में रहते हैं।
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले के खेतों और आसपास के इलाकों में 500 से ज्यादा तेंदुए मौजूद होने का अनुमान है। विभाग के अनुसार, इनकी संख्या बढ़ भी रही है। तेंदुओं को पकड़ने के लिए 100 से ज्यादा पिंजरे लगाए जा चुके हैं और करीब 120 तेंदुओं को पकड़े जाने का दावा किया गया है। इसके बावजूद हमलों का सिलसिला जारी है।
तेंदुओं को मारने की कार्रवाई की मांग
घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे नजीबाबाद के सीओ सुनील कुमार सिंह भी हालात देखकर नाराज नजर आए। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों के सामने तेंदुओं के लगातार बढ़ते हमलों पर नाराजगी जताई। सीओ ने अधिकारियों से कहा कि स्थिति गंभीर हो चुकी है और उच्चाधिकारियों से अनुमति लेकर चार-छह तेंदुओं को मारने की कार्रवाई की जाए, ताकि आगे किसी की जान न जाए।
सीओ के इस बयान के बाद इलाके में तेंदुआ समस्या को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उनका बयान ग्रामीणों के बीच बढ़ते डर और आक्रोश को भी सामने लाता है।
ग्रामीणों में दहशत, स्थायी समाधान की मांग
बबीता की मौत के बाद आलोपुर समेत आसपास के कई गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार हमलों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। लोगों ने मांग की है कि हमले के लिए जिम्मेदार तेंदुए को जल्द पकड़ा जाए और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तेंदुओं के हमलों को रोकने के लिए जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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