करीब डेढ़ साल से चल रहे विवाद के बाद प्रशासन ने शुरू किया ध्वस्तीकरण, अदालत ने सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली का आदेश बरकरार रखा था
Rahul Gupta
सहारनपुर, 5 सितंबर।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद शनिवार सुबह बुलडोजर कार्रवाई में बदल गया। शुक्रवार देर रात से ही मस्जिद को गिराए जाने की खबर सोशल मीडिया और शहर में तेजी से फैल रही थी। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और पांचों गेट बंद कर दिए गए। शनिवार तड़के करीब चार बजे प्रशासन ने मस्जिद को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। सुबह तक मस्जिद का एक हिस्सा गिरा दिया गया था। पूरी इमारत को हटाने के लिए छह बुलडोजर लगाए गए हैं।
रात में बढ़ी पुलिस की मौजूदगी
कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील परिसर के आसपास देर रात अचानक भारी पुलिस बल की तैनाती से मस्जिद को लेकर चल रही चर्चाओं को और बल मिला। मुस्लिम पक्ष के लोगों और स्थानीय नेताओं को जब कलेक्ट्रेट के गेट बंद किए जाने और पुलिस बल की तैनाती की जानकारी मिली तो उनकी सक्रियता बढ़ गई।
रात में समाजवादी पार्टी के विधायक आशु मलिक, एमएलसी शाहनवाज खान समेत कई नेता कलेक्ट्रेट पहुंचने के लिए निकले, लेकिन उन्हें परिसर के गेट के बाहर ही रोक दिया गया। स्थिति को देखते हुए रैपिड एक्शन फोर्स की भी तैनाती की गई।
जिला अदालत ने बरकरार रखा था सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश
मस्जिद पर कार्रवाई के पीछे करीब डेढ़ साल से चल रहा कानूनी विवाद है। जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने 2 सितंबर 2026 को मस्जिद पक्ष की ओर से दाखिल अपील खारिज कर दी थी। इसके साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह के 16 जुलाई 2026 के आदेश को बरकरार रखा गया था।
जिला अदालत ने विवादित भूमि को सरकारी भूमि माना था। मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए 20 जुलाई को अपील दाखिल की थी। इस मामले में अदालत में कुल 17 तारीखों पर सुनवाई हुई।
सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानकर बेदखली का आदेश
सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई में मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली का आदेश दिया था। आदेश में 30 दिन के भीतर परिसर खाली करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की गई थी।
मस्जिद पक्ष ने अदालत में इसे वक्फ संपत्ति बताते हुए दावा किया था कि मस्जिद करीब 150 वर्ष पुरानी है। हालांकि, अदालत में इस दावे के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
शुक्रवार रात फैल गई थी मस्जिद गिराने की खबर
शुक्रवार रात अचानक यह खबर फैलने लगी कि प्रशासन कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को रात में ही गिराने जा रहा है। देखते ही देखते यह चर्चा सोशल मीडिया और शहर में फैल गई। इसके बाद कलेक्ट्रेट के बाहर नेताओं और स्थानीय लोगों की हलचल बढ़ने लगी।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने देर रात लाइव आकर मस्जिद मामले पर अपनी बात रखी। उनके दामाद शायान मसूद ने भी लाइव के जरिए घटनाक्रम की जानकारी दी। इस बीच मुस्लिम पक्ष के नेताओं में भी बेचैनी बढ़ गई।
डीएम से मुलाकात के बाद बदला घटनाक्रम
देर रात समाजवादी पार्टी के कई नेताओं की जिलाधिकारी अरविंद चौहान से मुलाकात की बात भी सामने आई। नेताओं ने मस्जिद पर कार्रवाई की आशंका जताई थी। बताया गया कि उस समय प्रशासन की ओर से यह भरोसा दिया गया था कि मस्जिद को केवल सील किया जा रहा है और तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं होगी।
इसी वजह से रात में मौजूद मुस्लिम पक्ष के लोगों में यह उम्मीद बनी रही कि सुबह मस्जिद को नहीं गिराया जाएगा। हालांकि, शनिवार तड़के करीब चार बजे प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।
सुबह चार बजे शुरू हुआ बुलडोजर एक्शन
शनिवार सुबह करीब चार बजे कलेक्ट्रेट परिसर में कार्रवाई शुरू हुई। परिसर के गेट बंद कर दिए गए और बाहरी लोगों की आवाजाही रोक दी गई। अंदर अधिकारी और पुलिसकर्मी मौजूद रहे, जबकि बाहर भी भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
इसके बाद बुलडोजर मस्जिद तक पहुंचाए गए और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। शुरुआती कार्रवाई में मस्जिद का एक हिस्सा गिरा दिया गया। पूरी इमारत को हटाने के लिए छह बुलडोजर लगाए गए हैं।
इकरा हसन को हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा
मामले को लेकर राजनीतिक सक्रियता भी देर रात बढ़ गई। कैराना सांसद इकरा हसन के सहारनपुर आने की तैयारी की जानकारी सामने आई, लेकिन उन्हें हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा किया गया। प्रशासन की ओर से कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास भीड़ और राजनीतिक जमावड़े को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।
2025 में शुरू हुआ था विवाद
कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी। इसके बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्याशियों की बेदखली) अधिनियम के तहत मामला दाखिल हुआ था।
लंबी सुनवाई के बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली और ध्वस्तीकरण का आदेश दिया। मस्जिद पक्ष ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी, लेकिन 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने अपील खारिज कर सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा।
अदालती आदेश के बाद शनिवार सुबह शुरू हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। प्रशासन की कार्रवाई के बीच कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात है।
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