UP के पास पोटेंशियल की कोई कमी नहीं : योगी

9 वर्ष में तैयार हुई बदलाव की मजबूत नींव

युवाओं को भरपूर अवसर देने का तैयार हुआ ईको सिस्टम: सीएम योगी

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर का पांचवां स्थापना दिवस समारोह

आर्थिक समृद्धि में सहायक हो सकता है युवाओं को मिल रहा अवसर : मुख्यमंत्री

न्यूज़म ब्यूरो

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गोरखपुर, 28 अगस्त। गोरक्षपीठाधीश्वर, मुख्यमंत्री एवं महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर युवा को उसकी योग्यता, रुचि और क्षमता के अनुरूप सीखने, अवसर पाने, उद्यम करने और आगे बढ़ने का भरपूर अवसर उपलब्ध कराने के लिए डबल इंजन सरकार ने प्रदेश में एक मजबूत ईको सिस्टम तैयार किया है। सरकार की तरफ से यूपी में पिछले नौ वर्षों में शिक्षा और कौशल से लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर, निवेश, स्टार्टअप, एमएसएमई और इंडस्ट्री तक एक ऐसा व्यापक ईको सिस्टम विकसित किया गया है जो युवाओं की क्षमता को अवसर, अवसर को रोजगार और रोजगार को आर्थिक समृद्धि में बदलने में सहायक हो सकता है।

सीएम योगी शुक्रवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के पांचवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि आज युवाओं के सामने आगे बढ़ने के अवसर केवल सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं हैं। उनके लिए एजुकेशन (शिक्षा), स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास), इंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमिता), स्टार्टअप, एमएसएमई, इंडस्ट्री, डिजिटल इकोनॉमी और रिसर्च एंड इनोवेशन (अनुसंधान एवं नवाचार) जैसे अनेक अवसर हैं। सरकार का प्रयास है कि युवा को सीखने, प्रयोग करने, उद्यम शुरू करने और आगे बढ़ने का एक बेहतरीन वातावरण प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के पास पोटेंशियल की कोई कमी नहीं है। हमारे पास विशाल युवा शक्ति, कृषि शक्ति, उद्यमिता, प्राकृतिक संसाधन और समृद्ध ज्ञान परंपरा है। आवश्यकता इन सभी को एक दिशा, एक ईको सिस्टम और नए अवसर से जोड़ने की है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश ने इसी दिशा में बदलाव की मजबूत नींव तैयार की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर ने कनेक्टिविटी बढ़ाई है। बेहतर कनेक्टिविटी ने निवेश के बेहतरीन अवसर उपलब्ध करवाए हैं। निवेश ने इंडस्ट्री और रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं। डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर ने अवसरों को प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने की क्षमता भी दी है। एमएसएमई और ओडीओपी के माध्यम से स्थानीय उत्पादों, स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्पियों को बेहतरीन प्लेटफार्म प्राप्त हुआ है। इसी तरह स्टार्टअप ईको सिस्टम ने युवाओं को नौकरी खोजने से आगे बढ़कर नए समाधान और नए उद्यम खड़े करने के अवसर दिए हैं।

युवाओं को निवेश, उद्योग और अवसर का हिस्सा बनाना लक्ष्य
सीएम योगी ने कहा कि एजुकेशन, स्किल एंड हेल्थकेयर में बढ़ता इन्फ्रास्ट्रक्चर इस परिवर्तन को एक मजबूत ह्यूमन कैपिटल फॉर्मेशन से जोड़ रहा है। हमारा लक्ष्य है कि यूपी ऐसा प्रदेश बने जहां बड़े-बड़े निवेश आएं। हर युवा उन निवेशों, उद्योगों और अवसरों का हिस्सा भी बने।

केवल डिग्री तक सीमित न रहे शिक्षा की यात्रा
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी शिक्षा की यात्रा केवल डिग्री तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य ऐसे सक्षम युवा तैयार करना है जो अपने ज्ञान और कौशल से अवसर पैदा कर सकें। अवसर को रोजगार में और रोजगार को प्रगति में बदल सकें। विद्यार्थी केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं, रियल वर्ल्ड की समस्याओं को समझने और उसका समाधान निकालने का माध्यम बनें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा ऐसी हो जो क्लासरूम के ज्ञान को समाज की जरूरतों और इंडस्ट्री की आवश्यकता से जोड़ सके। विद्यार्थी खुद में जॉब क्रिएटर के साथ-साथ इनोवेटर, इंटरप्रेन्योर बनने की क्षमता भी पैदा कर सकें। आज की शिक्षा व्यवस्था एजुकेशन से स्किल, स्किल से कैपेबिलिटी, कैपेबिलिटी से अपॉर्चुनिटी, अपॉर्चुनिटी से इनोवेशन, इनोवेशन से इंटरप्रेन्योरशिप, इंटरप्रेन्योरशिप से एंप्लॉयमेंट, एंप्लॉयमेंट से इकोनॉमिक ग्रोथ की यात्रा होनी चाहिए। हमें इसे आगे बढ़ाना होगा।

ज्ञान की विरासत को जोड़ रहे आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी से
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पास भारत की हजारों वर्षों की ऋषि परंपरा की ज्ञान की एक बड़ी धरोहर है। ज्ञान की उस विरासत को आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर नई दिशा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने स्वास्थ्य को जीवन के रूप में देखा है। योग, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, मेडिसिनल प्लांट, ट्रेडिशनल एग्रीकल्चर नॉलेज के रूप में हमारे पास हजारों वर्षों की विरासत मौजूद है। रिसर्च और टेक्नोलॉजी के साथ हजारों वर्षों का भारतीय ज्ञान भविष्य के इनोवेशन, न्यू अपॉर्चुनिटी और न्यू इकोनॉमी की मजबूत आधारशिला बन सकता है।

पुस्तकों और परंपराओं तक सीमित नहीं रखना है ट्रेडिशनल नॉलेज को
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपने ट्रेडिशनल नॉलेज को केवल पुस्तकों और परंपराओं तक सीमित नहीं रखना है। हमें उसे रिसर्च और लैबोरेट्री से जोड़ना है और नई पीढ़ी के साथ शेयर भी करना है। सीएम ने कहा कि हमें आयुर्वेद को आधुनिक डायग्नोस्टिक, क्लीनिकल रिसर्च और नई मेडिकल टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ना है। मेडिसिनल प्लांट को आधुनिक एग्रीकल्चर, बायोटेक्नोलॉजी और फार्मास्यूटिकल रिसर्च से जोड़कर एक नई वैल्यू चेन तैयार करना है। योग और वैलनेस को प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और आधुनिक जीवन शैली की चुनौतियों के समाधान के साथ जोड़ना है। भारत के चिकित्सा ज्ञान को साइंटिफिक वैलिडेशन और क्वालिटी स्टैंडर्ड के साथ जोड़ते हुए उसे ग्लोबल बेंचमार्क के अनुरूप दुनिया तक पहुंचाना है।

ज्ञान विधाओं के संगम से निकलेगा भविष्य की समस्याओं का समाधान
सीएम योगी ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के परिसर में ट्रेडिशनल मेडिसिन, मॉडर्न मेडिसिन, नर्सिंग, फार्मेसी, एग्रीकल्चर आदि ज्ञान की विधाओं का प्रसार हो रहा है। सामान्य रूप से इन्हें हम अलग-अलग स्ट्रीम के रूप में देखते हैं। हम यह मानते हैं कि यह मॉडर्न मेडिसिन यानी एलोपैथ के हैं, यह फार्मेसी का है, यह नर्सिंग का है, यह एग्रीकल्चर का है लेकिन वास्तव में इनके बीच में एक आंतरिक कनेक्शन है जो आपस में एक दूसरे को जोड़ता है। इन सभी को अलग-अलग डिसिप्लिन के रूप में नहीं अपितु एक इंटीग्रेटेड नॉलेज एंड इनोवेशन ईको सिस्टम के रूप में देखना चाहिए। भविष्य की बड़ी समस्याओं का समाधान किसी एक विषय की सीमा में नहीं, अलग-अलग ज्ञान विधाओं के संगम से निकलेगा। जब यह सभी डिसिप्लिन साथ आएंगे तो बेहतर प्रोफेशनल्स के साथ-साथ न्यू रिसर्च, न्यू इनोवेशन, न्यू स्टार्टअप और न्यू एंप्लॉयमेंट के अवसर भी पैदा होंगे।

समस्या का सरल समाधान देना टेक्नोलॉजी का असल उद्देश्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी का असली उद्देश्य मानव जीवन की समस्या का बेहतर और एक सरल समाधान देना भी है। उन्होंने उदाहरण के साथ समझाते हुए कहा कि एआई आधारित डायग्नोसिस बीमारियों की पहचान को तेज और अधिक सटीक बनाने में सहायक है। टेलीमेडिसिन विशेषज्ञ सेवाओं को दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाने का बेहतर माध्यम बन सकता है। डिजिटल हेल्थ मरीज की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को बेहतर तरीके से मैनेज करने में सहायता कर सकता है। मेडिकल डिवाइसेज बेहतर डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट के लिए उन्नत तकनीक उपलब्ध कराने में सहायक है। इसी तरह बायोटेक्नोलॉजी और जीनोमिक्स भविष्य की चिकित्सा और रिसर्च के नए रास्ते खोलते हैं। डाटा ड्रिवन हेल्थ केयर डाटा के आधार पर बेहतर और अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं देने में सहायक होता है। प्रेसिजन फार्मिंग के माध्यम से कम संसाधनों का अधिकतम और वैज्ञानिक उपयोग करते हुए अधिक उत्पादन के साथ-साथ बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है। ड्रोन टेक्नोलॉजी के माध्यम से फसलों की निगरानी, सटीक छिड़काव, फसल का आकलन और अधिक प्रभावी एवं वैज्ञानिक बनाए जा सकते हैं। सॉयल टेक्नोलॉजी के माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता और पोषक तत्वों का आकलन कर उसके अनुरूप साइंटिफिक एवं बैलेंस फार्मिंग को बढ़ावा दिया जा सकता है। स्मार्ट इरिगेशन के माध्यम से कितने पानी की आवश्यकता है, इसके अनुरूप सिंचाई कर जल की बचत, फसल को बेहतर वृद्धि और खेत की प्रोडक्टिविटी को बेहतर बनाया जा सकता है। एग्री प्रोसेसिंग के माध्यम से किसान की उपज में वैल्यू एडिशन कर उसकी मार्केट वैल्यू और आय में वृद्धि की जा सकती है। क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर के माध्यम से बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती की नई तकनीकों को अपनाकर प्रोडक्शन और फार्मर की आय को और बेहतर किया जा सकता है। रिसर्च डेटाबेस के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को व्यवस्थित और संरक्षित कर आधुनिक अनुसंधान के लिए उसे उपयोगी बनाया जा सकता है। क्वालिटी टेस्टिंग के माध्यम से औषधियों की गुणवत्ता, प्रभावशीलता और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। सीएम ने कहा कि मॉडर्न मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक उत्पादन प्रणालियों से जोड़कर गुणवत्तापूर्ण और बड़े पैमाने पर उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। एविडेंस बेस्ड वैलिडेशन के माध्यम से पारंपरिक उपचारों की वैज्ञानिक जांच और प्रभावशीलता का और परीक्षण किया जा सकता है।

यूपी की संभावनाओं का द्वार है गोरखपुर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोरखपुर केवल एक शहर नहीं है, बल्कि यह यूपी की संभावनाओं का द्वार है। इसकी पहचान केवल एक धार्मिक और ऐतिहासिक परंपरा के शहर के रूप में सीमित नहीं रह सकती। गोरखपुर को एजुकेशन, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और इनोवेशन के एक बड़े रीजनल नॉलेज एंड इकोनॉमिक हब के रूप में विकसित किया जा सकता है।

कैंपस का ज्ञान तभी सार्थक जब वह समाज की शक्ति बने
सीएम योगी ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जहां शिक्षा के साथ रिसर्च एंड डेवलपमेंट, इनोवेशन, इंडस्ट्री एंड एंप्लॉयमेंट के बीच एक मजबूत संबंध हो सके। विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में पैदा होने वाला जो नॉलेज है, वह क्लासरूम और कैंपस की चारदीवारियों से बाहर निकल कर प्रदेश के गांवों, किसानों, हॉस्पिटल्स, इंडस्ट्री और स्टार्टअप तक पहुंचे। कृषि के विद्यार्थियों की रिसर्च किसानों की आय और उत्पादकता को बढ़ाने में सहायक बने। मेडिकल स्टूडेंट्स का रिसर्च गांवों की हेल्थकेयर सेवाओं को बेहतर बनाए। फार्मेसी का रिसर्च नई दवाओं और हेल्थकेयर में इनोवेशन को जन्म दे। टेक्नोलॉजी इन सभी को बड़े बाजार और नई अर्थव्यवस्था के साथ जोड़े। सीएम ने कहा कि कैंपस में पैदा होने वाला ज्ञान जब किसी किसान के खेत, मरीज के जीवन, उद्योग की जरूरत और युवा के उद्यम तक पहुंचेगा, तभी विश्वविद्यालय का ज्ञान वास्तव में समाज की शक्ति और देश की आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरेगा।

जॉब रेडी नहीं, फ्यूचर रेडी बनें विद्यार्थी
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि आपको केवल जॉब रेडी नहीं होना है, आपको फ्यूचर रेडी होना है। आज की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है, इसलिए केवल किसी एक नौकरी के लिए तैयार होना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को ऐसी स्किल, ऐसे विजन और ऐसा विल पॉवर विकसित करना है, जो बदलती दुनिया के साथ लगातार आगे बढ़ने के लिए एक बेहतरीन अवसर दे सके। अपने आप से केवल ये सवाल मत पूछिए कि मैं अपने लिए क्या कर सकता हूं, इससे एक कदम आगे बढ़कर पूछिए कि मैं अपने ज्ञान, अपनी प्रतिभा और अपनी क्षमता से समाज और देश के लिए क्या कर सकता हूं।

विकास के लिए गवर्नमेंट, यूनिवर्सिटी, इंडस्ट्री और यूथ की साझेदारी आवश्यक
सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश के विकास के लिए गवर्नमेंट, यूनिवर्सिटी, इंडस्ट्री और यूथ, इन चारों की साझेदारी आवश्यक है। सरकार ईको सिस्टम तैयार करेगी जहां शिक्षा, निवेश, रिसर्च, स्टार्टअप और रोजगार के अवसर पैदा हों। विश्वविद्यालय नॉलेज एंड रिसर्च पैदा करें, ऐसी शिक्षा और रिसर्च जो समाज और इंडस्ट्री की वास्तविक जरूरत से जुड़ी हुई हो। इंडस्ट्री अवसर और बाज़ार दे। विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, एम्प्लॉयमेंट, रिसर्च और उद्यम के अवसर से जोड़े। युवा इनोवेशन और इंटरप्राइज की शक्ति बनें और अपने ज्ञान को नए विचारों, नए समाधानों और नए उद्यमों में बदलें। उन्होंने कहा कि जब ये चारों एक साथ काम करेंगे, तो नॉलेज को इनोवेशन में, इनोवेशन को इंटरप्राइज में, इंटरप्राइज को एम्प्लॉयमेंट में और एम्प्लॉयमेंट को इकोनॉमिक ग्रोथ में पूरा देश देखेगा। यही वो चक्र है जो युवा की प्रतिभा को देश की आर्थिक प्रगति में बदल सकता है।

अपने आप में टापू न बनें विश्वविद्यालय
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने आप में एक टापू न बनें। बल्कि समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दें। तब हमारा युवा जॉब सीकर नहीं, जॉब क्रिएटर बनने का आत्मविश्वास अपने अंदर पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी शिक्षा विकसित करनी है जहां गांव का युवा और किसान भी टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से नई वैल्यू और नई इनकम को पैदा कर सके। ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है जहां यूनिवर्सिटी केवल डिग्री देने वाली संस्थाएं नहीं, बल्कि नॉलेज, इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप और इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन के इंजन बनें। ट्रेडिशनल नॉलेज से मॉडर्न सजन्स तक, एजुकेशन से इनोवेशन तक, इनोवेशन से इंटरप्राइज तक, इंटरप्राइज से एम्प्लॉयमेंट तक और एम्प्लॉयमेंट से देश की इकोनॉमिक प्रोस्पेरिटी तक एक कंप्लीट ईको सिस्टम बन सके। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास पोटेंशियल की कोई कमी नहीं है। इस पोटेंशियल को पॉसिबिलिटी में और पॉसिबिलिटी को प्रोस्पेरिटी में बदलने की एक क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय ने इस परिवर्तन यात्रा को आगे बढ़ाया है।

एमपी शिक्षा परिषद की स्थापना से लेकर विश्वविद्यालय संचालन तक की यात्रा को याद किया सीएम ने
मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना से लेकर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के संचालन तक की यात्रा का भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि देश की पराधीनता के उस कालखंड में जब भारत अपनी आजादी की अंगड़ाई ले रहा था तब भारत की ऋषि परंपरा के महत्वपूर्ण केंद्र गोरक्षपीठ ने देश की भावी पीढ़ी के निर्माण के लिए 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना कर एक बीज का रोपण गोरखपुर में किया था। युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने शिक्षा परिषद की नींव रखी। उन्होंने आजाद भारत के पहले विश्वविद्यालय, गोरखपुर विश्वविद्यालय को शुरू करने के लिए शिक्षा परिषद के दो महाविद्यालयों को दान स्वरूप दे दिया। पूर्वी उत्तर प्रदेश की पहली महिला महाविद्यालय की स्थापना भी महंत दिग्विजयनाथ जी ने गोरखपुर में की थी और उत्तर प्रदेश का पहला टेक्निकल इंस्टीट्यूट, महाराणा प्रताप पॉलिटेक्निक भी उन्होंने शुरू किया। आज महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद 50 से अधिक शिक्षण प्रशिक्षण संस्थाओं को प्रकल्प सेवा के प्रकल्पों को संचालित करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में, स्वास्थ्य के क्षेत्र में, सेवा के क्षेत्र में, अलग-अलग क्षेत्र में अपने उन उत्तरदायित्वों का निर्वहन सफलतापूर्वक करने का प्रयास कर रहा है। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के बाद गोरक्षपीठ के इस दायित्व का निर्वहन एक लंबे समय तक ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय का शुभारंभ आज से ठीक 5 वर्ष पहले तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया था। हालांकि इसकी नींव उससे 12 वर्ष पहले यहां पर पड़ चुकी थी।

शिक्षा का प्रसार और समाज का उत्थान गोरक्षपीठ का संकल्प : कुलपति
स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री एवं अन्य अभ्यागतों का स्वागत करते हुए एमजीयूजी के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने कहा कि युगों-युगों से गोरक्षपीठ मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहा है। शिक्षा का प्रसार और समाज का उत्थान गोरक्षपीठ का संकल्प रहा है। इसी संकल्प को सिद्ध करने के लिए 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना हुई। इसके बाद दीप से दीप जलते गए, एक के बाद एक शिक्षण संस्थान खुलते गए। सेवा के संकल्प को विराट रूप देने के क्रम में गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जी ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय की स्थापना की। उन्होंने कहा कि स्थापना के पांच वर्ष में ही यहां पाठयक्रम की संख्या 12 से बढ़कर 53 हो गई है।

इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, विधायक महेंद्रपाल सिंह, भारत सरकार के पूर्व औषधि महानियंत्रक एवं वर्तमान में यूपी सरकार के सलाहकार डॉ. जीएन सिंह, यूपी सरकार के सलाहकार अवनीश अवस्थी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. वी.एन. राजशेखरन पिल्लई, हेल्थ यूनिवर्सिटी पश्चिम बंगाल के पूर्व कुलपति डॉ. भवतोष विश्वास, कैलिफोर्निया (अमेरिका) के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय तिवारी, मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मीरजापुर की कुलपति प्रो. शोभा गौड़, श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की प्राचार्य डॉ. वर्षा एम., एमजीयूजी के पूर्व कुलपति मेजर जनरल डॉ. अतुल वाजपेयी, कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव सहित कई जनप्रतिनिधि, गणमान्यजन, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता रही। आभार ज्ञापन नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्य डॉ. डी.एस. अजीथा ने किया।

दो पुस्तकों का हुआ विमोचन
पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय की तरफ से प्रकाशित, अंग्रेजी प्रवक्ता डॉ. अनुकृति राज की पुस्तक ‘नेशन एंड एक्सप्रेशन’ एवं ‘अमृतकाल और राष्ट्रवाद’ का विमोचन किया।

प्रतिभाओं का हुआ सम्मान
समारोह में सीएम योगी ने शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध कार्य, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों पुरस्कृत करने के साथ उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों, कार्मिकों को सम्मानित किया।

बेस्ट हाउस का पुरस्कार ऑरेंज हाउस को, सर्वश्रेष्ठ परफ़ॉर्मर का पुरस्कार यलो हाउस की प्रियंका पुनिया को प्राप्त हुआ। सीएम ने श्रेष्ठतम परिचर का सम्मान सूर्यदेव भारती को, श्रेष्ठतम नर्स सरिता कुमारी, श्रेष्ठतम कर्मचारी शाम्भवी दिवेदी, श्रेष्ठतम अधिकारी उप कुलसचिव श्रीकांत, श्रेष्ठतम शिक्षक का सम्मान डॉ सुनील कुमार सिंह को प्रदान किया। उन्होंने सीसीआरएस में चयनित आयुर्वेद के विद्यार्थियों रवि रंजन कुमार, विनीत सिंह, अरुण कुमार, प्रभाकर वर्मा तथा आईसीएमआर के रिसर्च के लिए चयनित एमबीबीएस की अक्षिता मिश्रा, ओम कुमार, सुयश कुमार सहाय को प्रशंसा पत्र भेंट किया। इसी क्रम में मेडिकल रिकॉर्ड में सराहनीय योगदान देने के लिए कर्मचारी गरिमा पांडेय, आद्या प्रजापति, नीतू यादव, श्रद्धा को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया।

रक्षाबंधन पर्व पर एमजीयूजी के परिसर में सीएम ने किया पौधरोपण
मंचीय कार्यक्रम के पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एमजीयूजी के परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। पौधरोपण के बाद एमजीयूजी के स्थापना दिवस समारोह के मंचीय कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती, भारत माता, भगवान श्रीगोरक्षनाथ, ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ एवं ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के चित्रों पर पुष्पांजलि के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति ने मुख्यमंत्री को स्मृतिचिन्ह भेंटकर उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) के गायन के साथ हुआ।

 

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