योगी जी, कहीं ये भी तो बांग्लादेशी नहीं !

अपनी रात्रिकालीन टार्च विकास नगर की शेखूपुरा कालोनी में भी जलवाइए
 
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में टार्च की रोशनी में बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को खोजने का क्रम लगातार जारी है। पर शायद अभी कुछ और इलाके ऐसे भी हैं, जहां टार्च की रोशनी पड़नी जरूरी है। शायद कुछ और संदिग्ध लखनऊ के विभिन्न इलाकों में किराए पर मकान लेकर रह रहे हैं। इसके पहले की कोई अनहोनी हो और, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा, हो इन पर भी टोर्च की रोशनी पड़ना जरूरी है।

उल्लेखनीय है कि योगी सरकार ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या खोजने के लिए रात्रिकालीन टार्च ब्रिगेड बना रखी है। और वह विभिन्न इलाकों में अपना काम कर भी रही है। इसी कड़ी में कुछ और भी इलाके हैं, जिन पर टॉर्च की रोशनी पड़नी जरूरी है। बात कर रहे हैं लखनऊ के विकास नगर थाना क्षेत्र स्थित शेखूपुरा कालोनी की। जानकारी के अनुसार चार-पांच महीना पहले कई परिवार कहीं से आए हैं और शेखूपुरा कॉलोनी में विभिन्न जगहों पर किराए का मकान लेकर रहने लगे हैं। ये सभी लोगों को घरों में बर्तन मांजने और अन्य घरेलू काम करते हैं। जैसा कि बांग्लादेशी करते हैं। उनकी गतिविधियों पर निगाह तब पड़ी जब शेखूपुरा के मकान नंबर 254 में रहने वाले एक परिवार में आपस में जमकर मारपीट और गाली गलौज हुई।

हुआ यह कि 22 दिसंबर की रात करीब दस बजे के आसपास उस घर में बहुत तेज-तेज आवाजें आने शुरू हुई। पता चला कि बाप-बेटे मिलकर मां-बेटी को मार रहे थे। इस दौरान जमकर गाली-गलौज भी होती रही। जब बाहर देखा गया तो पति-पत्नी आपस में लड़ रहे थे। मामला इतना बढ़ गया था कि पत्नी ने 112 पर फोन करके पुलिस बुला ली। पुलिस के सामने भी गाली-गलौज और मारपीट का क्रम चलता रहा। मामला संभलता न देख 112 वाली पुलिस ने थाना पुलिस को भी बुला लिया। इसमें पास ही रहने वाले महिला के मायके पक्ष वाले भी आ गए थे, और एक बार फिर गाली-गलौज और मारपीट पुलिस के सामने भी हुई। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह रही कि चाहे 112 की पुलिस हो या थाना पुलिस, दोनों तमाशा देखते रहे। जबकि महिला लगातार कह रही थी कि इस आदमी ने हमको जान से मारने की कोशिश की है, इसको आप पकड़ कर ले जाइए। इस पर पुलिस का जवाब था कि थाने में कोई डॉक्टर थोड़े बैठा है, जो इसकी दारू ठीक कर देगा। इतना कहकर दोनों पुलिस लौट गयीं।

आगे जानकारी करने पर पता चला कि यह परिवार अकेला नहीं है। इसके सगे संबंधी लगभग 4-5 जगह कॉलोनी में ही मकान किराए पर लेकर रहते हैं। इनकी गतिविधियां देखकर तो ऐसा ही लगता है कि ये यहां के नहीं हैं। हो सकता है कि यह आशंका मात्र हो लेकिन पहचान की वेरिफिकेशन होना जरूरी है। क्योंकि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा का है। इस मामले में संदेह यही लग रहा है कि एक साथ एक ही प्रकार के चार-पांच परिवारों का शेखूपुरा कालोनी में आना, सामान्य नहीं हो सकता। किसी भी मोहल्ले में किराएदार आते हैं, चले जाते हैं। लेकिन एक साथ एक ही प्रकृति के इतने लोगों का आना संदेह पैदा करता है।

ऐसा तो नहीं है कि ये कहीं से भगाए गए हों और यहां आकर छिप गए हों। जहां तक मकान नंबर 254 की बात है तो पता चला है कि उसके मकान मालिक कहीं और रहते हैं, लखनऊ में ही। चूंकि ये मामला कॉलोनी की सुरक्षा और शांति का भी है, इसलिए इस मामले में शीघ्र कार्रवाई अपेक्षित है। वैसे भी इनकी गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हो रही हैं। ऐसे में इनकी पहचान का वेरिफिकेशन कर लेने में कोई बुराई नहीं है। ताकि भविष्य में इनको लेकर कोई ऐसी स्थिति न पैदा हो जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकती हो।

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