विकसित उत्तर प्रदेश@2047 : बोले योगी, कार्ययोजना ठोस फ्रेमवर्क के साथ जमीन पर उतारें

विकसित यूपी@2047 के लिए मिले 98 लाख से अधिक सुझाव, अब शीघ्र जारी होगी सेक्टरवार विस्तृत कार्ययोजना

मुख्यमंत्री का निर्देश: 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को सेक्टरवार रणनीति से हासिल करें

विजन डॉक्यूमेंट को परिणामोन्मुख और समयबद्ध कार्ययोजना में बदलें

मुख्यमंत्री ने कहा, हर विभाग तय करे स्पष्ट जिम्मेदारी, त्रैमासिक और वार्षिक लक्ष्यों पर काम हो

निवेश, नवाचार और विनिर्माण का वैश्विक केंद्र होगा उत्तर प्रदेश : मुख्यमंत्री

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राहुल भटनागर 

लखनऊ, 31 मार्च। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को ‘विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ की कार्ययोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि यह दस्तावेज केवल एक विजन नहीं, बल्कि प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और संरचनात्मक रूपांतरण का स्पष्ट रोडमैप है। उन्होंने निर्देश दिए कि इसे व्यापक और सहभागी बनाते हुए प्रदेशभर से प्राप्त 98 लाख से अधिक जन-सुझावों, विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों तथा अन्य हितधारकों के विचारों का विश्लेषण करते हुए समाहित किया जाए और उसी आधार पर सेक्टरवार अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजना शीघ्र जारी की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विजन डॉक्यूमेंट व्यवहारिक, परिणामोन्मुख और समयबद्ध होना चाहिए, जो प्रदेश को 2047 तक विकसित राज्य बनाने का ठोस आधार प्रस्तुत करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे केवल सैद्धांतिक दस्तावेज न रखकर सेक्टरवार मिशनों, 2030, 2036 और 2047 के स्पष्ट लक्ष्यों तथा क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजनाओं में विभाजित किया जाए। साथ ही सभी विभाग त्रैमासिक एवं वार्षिक लक्ष्यों के अनुरूप विभागवार और अंतर-क्षेत्रीय कार्ययोजना तैयार करें, जिसमें जिम्मेदारियों, अपेक्षित परिणामों और समन्वय की व्यवस्था स्पष्ट रूप से निर्धारित हो।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य स्तर पर तैयार विजन को जिला, शहर और पंचायत स्तर तक प्रभावी रूप से लागू किया जाए। इसके लिए ‘जिला विजन 2047’ तैयार कर स्थानीय आवश्यकताओं और संसाधनों के अनुरूप योजनाएं बनाई जाएं। साथ ही प्रमुख परियोजनाओं की सुव्यवस्थित पाइपलाइन तैयार कर उनकी सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि विकास कार्यों का प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश का पूरा ढांचा तीन प्रमुख स्तंभों ‘अर्थशक्ति, जनशक्ति और जीवनशक्ति’ पर आधारित है, जिन्हें मजबूत करने के लिए कृषि, उद्योग, सेवाएं, बुनियादी ढांचा, सामाजिक क्षेत्र और सुशासन को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाना होगा। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विजन डॉक्यूमेंट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए रीयल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से नियमित समीक्षा व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि प्रगति की सतत निगरानी हो और आवश्यक सुधार समय पर सुनिश्चित किए जा सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दस्तावेज स्थिर नहीं, बल्कि एक डायनामिक और एक्शन-ओरिएंटेड मार्गदर्शिका होनी चाहिए।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश ने 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है, जबकि 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और 2036 तक 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का मध्यवर्ती लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगभग 16 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर आवश्यक आंकी गई है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था लगभग 356 बिलियन डॉलर के स्तर पर है और भारत की जीडीपी में इसका योगदान करीब 9 प्रतिशत से अधिक है।

मुख्यमंत्री ने सेक्टर आधारित रणनीति पर विशेष जोर देते हुए कहा कि कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में संतुलित और उच्च उत्पादकता आधारित विकास सुनिश्चित किया जाए। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को लेकर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि स्मार्ट कृषि, वैल्यू चेन आधारित मॉडल, निर्यातोन्मुख उत्पादन और डिजिटल प्लेटफॉर्म को बढ़ावा दिया जाए। पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बताते हुए मुख्यमंत्री ने इनके वैज्ञानिक विकास, प्रोसेसिंग और बाजार संपर्क को सुदृढ़ करने पर जोर दिया।

औद्योगिक विकास के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को टेक्नोलॉजी आधारित, निर्यातोन्मुख और वैश्विक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित किया जाना है। बैठक में बताया गया कि राज्य के मैन्युफैक्चरिंग GVA में MSME का योगदान लगभग 46 प्रतिशत है तथा निवेश आकर्षित करने के लिए 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू हस्ताक्षरित किए गए हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में परियोजनाएं क्रियान्वयन की अवस्था में हैं।

सेवा क्षेत्र और डिजिटल अर्थव्यवस्था को विकास का प्रमुख इंजन बताते हुए मुख्यमंत्री ने आईटी, आईटीईएस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यटन और नवाचार आधारित क्षेत्रों में तेजी से विस्तार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को ज्ञान और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप इकोसिस्टम और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाए।

बैठक में यह भी बताया गया कि लगभग 24 करोड़ की जनसंख्या के साथ उत्तर प्रदेश देश का एक विशाल उपभोक्ता बाजार है और कार्यशील आयु वर्ग की बड़ी हिस्सेदारी इसे विकास के लिए विशेष अवसर प्रदान करती है। अनुमान है कि 2047 तक शहरीकरण दर 60 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सुशासन, कानून व्यवस्था, डिजिटल सेवाओं और मजबूत आधारभूत ढांचे को इस पूरी कार्ययोजना की रीढ़ बनाया जाए। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक कॉरिडोर के माध्यम से कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ किया जाए, जिससे निवेश और रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ें।

मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि ‘विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ एक समग्र परिवर्तन का अभियान है, जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक न्याय, समावेशिता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार को समान महत्व दिया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यह विजन प्रदेश की विकास यात्रा का ऐसा प्रभावी दस्तावेज बने, जो उत्तर प्रदेश को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में अग्रणी स्थान दिलाए।

 

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