गलगोटिया यूनिवर्सिटी फिर घिरी विवाद में

न्यूज़म ब्यूरो

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। हाल ही में आयोजित AI समिट में कथित तौर पर चीनी उत्पाद को अपना इनोवेशन बताने के आरोपों के बाद अब विश्वविद्यालय की पेटेंट फाइलिंग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार यूनिवर्सिटी की ओर से बीते वर्षों में हजारों की संख्या में पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए, लेकिन इनमें से बहुत ही कम पेटेंट को वास्तविक मंजूरी मिली। विशेषज्ञों का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया शोध और नवाचार से ज्यादा रैंकिंग सुधारने के लिए ‘नंबर गेम’ का हिस्सा हो सकती है। आरोप है कि बड़ी संख्या में पेटेंट आवेदन दाखिल कर NIRF रैंकिंग और NAAC ग्रेडिंग को बेहतर दिखाने की कोशिश की गई। इसके साथ ही पेटेंट से जुड़ी सरकारी सब्सिडी और इंसेंटिव का लाभ उठाने का भी संदेह जताया जा रहा है।

सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या बिना ठोस नवाचार के दाखिल किए गए पेटेंट आवेदनों के जरिए प्रोत्साहन राशि हासिल की गई। यदि ऐसा है, तो पेटेंट सब्सिडी के नाम पर कितनी सरकारी धनराशि खर्च हुई या उसका दुरुपयोग किया गया, यह जांच का विषय बन गया है।

AI समिट में सामने आए विवाद के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की मांग है कि सरकार पेटेंट फाइलिंग के लिए दी गई आर्थिक सहायता, उसकी प्रक्रिया और उससे हासिल वास्तविक उपलब्धियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं इनोवेशन के नाम पर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग तो नहीं किया गया। फिलहाल इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते सवालों के बीच जांच की मांग तेज होती जा रही है।

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