BBA (टूरिज्म) कोर्स के एडमिशन में गोलमाल के आरोप

मेधावी बच्चों को टरकाने की कहानी

एबीवीपी ने काटा हंगामा, आश्वासन के बाद भी नहीं खोला पोर्टल

जुगाड़ और पैसे लेकर एडमिशन करने के भी आरोप

करीब दो माह पीछे चल रही एडमिशन प्रक्रिया

लीगल एडिटर 

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लखनऊ, 26 अगस्त। लखनऊ विश्वविद्यालय के बीबीए (टूरिज्म) कोर्स में एडमिशन इंचार्ज अनित्य गौरव की टीम ने कुलपति जय प्रकाश सैनी के आदेश की अवहेलना जारी रखी है। एक तरफ कुलपति छात्रों को आश्वासन देते हैं कि कोई गड़बड़ी नहीं बरती जाएगी, वहीं दूसरी तरफ मेरिटोरियस छात्रों की फीस लेने में 4 दिन देरी करके उन्हें टरकाने की व्यवस्था की जा रही है। यही नहीं मेरीटोरियस छात्र के बाद के रैंक से फीस जमा कर ली गई, जिस पर छात्र भड़के हुए हैं।

पिछले चार दिन से छात्रों के लगातार अनित्य गौरव के कार्यालय जाने के बाद भी फीस जमा करने का पोर्टल नहीं खोला जा रहा है। छात्र नेता अनुराग तिवारी ने आरोप लगाया कि एबीवीपी के हस्तक्षेप के बाद शुक्रवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के एडमिशन इंचार्ज यानी अनित्य गौरव ने बोला कि बाकी बची 46 सीटों पर फीस का ऑप्शंस खोला जाएगा। छात्रों का आरोप है कि 1210 रैंक के एक एडमिशन के लिए पोर्टल खुला, शेष छात्रों के लिए यह पोर्टल अभी ही बंद है। आवेदन करने वाली सूची में 900, 977, 1057, 1061, 1062, 1108, 1130, 1134 रैंक के बच्चे अभी तक फीस नहीं जमा कर पा रहे। जबकि 1210 रैंक के बच्चे का प्रवेश हुआ है, उसे टूरिज्म विभाग द्वारा अप्रूव भी किया गया है।

इसके अतिरिक्त 3314 वी रैंक के बच्चे का पोर्टल शुक्रवार को खोला जा चुका है। मौके पर खड़े कई सारे छात्रों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर कहा कि एडमिशन में पैसे का खेल चल रहा है, जो ऊपर तक पैसे और जुगाड़ पहुंचा रहा है, उसका एडमिशन हो जा रहा है, बाकी के गरीबऔर मेधावी छात्र सिर्फ परेशान हो रहे हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र नेताओं की भी सुनने वाला कोई नहीं है, अगर वह अपनी बात रखते हैं तो उनको भी सीरियसली नहीं लिया जा रहा। छात्रों का कहना है कि बीबीए (टूरिज्म) तो मजबूरी में एडमिशन लिया जा रहा है, जिन बच्चों को कोर सब्जेक्ट में एडमिशन नहीं मिल पाया, वे ही बच्चे मज़बूरी में टूरिज्म में जाना चाह रहे थे, इसलिए चॉइस फिलिंग में उसको भरने का कोई सवाल ही नहीं उठता है।

अनित्य गौरव पहले से ही अपने प्रमोशन और थिसिस को लेकर विवादित रहे हैं और एडमिशन में उनके विवाद की वजह से लखनऊ विश्वविद्यालय की छवि सबसे ज्यादा खराब हो रही है। आरोप है कि वह जानबूझकर मेरीटोरियस बच्चों के एडमिशन नहीं ले रहे हैं, देरी करने के लिए पोर्टल नहीं खोल रहे हैं, जिससे देर होगी और बच्चे कहीं और चले जाएंगे, फिर वह अपने मनमाने ढंग से वह अपनी लिस्ट को फाइनल कर लेंगे। छात्रों और शिक्षकों में आम चर्चा है कि अनित्य गौरव लूटा के अध्यक्ष हैं, इस वजह से ही उनको आधा दर्जन से अधिक पद से तत्कालीन कुलपति आलोक राय ने नवाजा था, अनित्य के लूटा अध्यक्ष होने की वजह से मौजूदा कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी भी डरे हुए हैं, इसलिए एडमिशन के इंचार्ज का पद उनसे छीन नहीं पा रहे हैं। यही नहीं उनकी झोली में प्रोवोस्ट का एक अलग से पद और डाल दिया है।

इसके अलावा अनित्य गौरव के पास स्नातक और परास्नातक की कॉपियों के मूल्यांकन का सारा काम है, जिसमें नियम विरुद्ध ढंग से नैतिकता को ताख पर रख करके उनकी बहन और पत्नी दोनों को ही मूल्यांकन के काम में अलग-अलग प्रकार की जिम्मेदारी मिली हुई है, ऐसे में प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग अथवा यूनिवर्सिटी की कॉपियों के मूल्यांकन नियमों का भी मजाक उड़ाया जा रहा है। एडमिशन में गोलमाल और तय नियमों के बाद भी एडमिशन प्रक्रिया खत्म ना होने के पीछे को लेकर जब आईपीपीआर डायरेक्टर मुकुल श्रीवास्तव से पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी बोलने से मना कर दिया। वह कहते हैं कि इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी अभी नहीं है।

 

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