चौबीस घंटे डिजिटल निगरानी से सुरक्षित बाल गृह और महिला शरणालय

स्टेट डाटा मैनेजमेंट सेंटर से पूरे प्रदेश की संस्थाओं पर रियल-टाइम नजर

लखनऊ, 3 जनवरी : योगी आदित्यनाथ सरकार में महिला और बाल सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर है। महिला कल्याण विभाग के अंतर्गत प्रदेशभर के बाल गृहों और महिला शरणालयों की 24×7 सीसीटीवी निगरानी के लिए अत्याधुनिक स्टेट डाटा मैनेजमेंट सेंटर (SDMC) के संचालन को और अधिक प्रभावी और तकनीक सक्षम बनाया गया है। लखनऊ में यह सेंटर अप्रैल 2025 से महिला कल्याण निगम, बंगला बाजार स्थित भवन में निरंतर कार्यरत है और पूरे प्रदेश की संस्थागत व्यवस्थाओं पर चौबीसों घंटे नजर रख रहा है। यह पहल केवल निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा, देख-रेख और अधिकारों की रक्षा की दिशा में सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को जमीन पर उतारने का ठोस उदाहरण है। तकनीक के सहारे पारदर्शिता और जवाबदेही को संस्थागत ढांचे का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।

विकेन्द्रीकृत निगरानी की व्यवस्था
प्रदेश में महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित 60 बाल गृहों और 10 महिला शरणालयों, यानी कुल 70 संस्थाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। इन कैमरों के माध्यम से न केवल गतिविधियों की निगरानी हो रही है, बल्कि हर स्तर पर व्यवस्थाओं की गुणवत्ता भी परखी जा रही है। निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए मंडल और जिला स्तर पर भी मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया गया है। 17 मंडलों के सापेक्ष 15 मंडलीय कार्यालयों में और 31 जनपदों के सापेक्ष 28 जनपदीय कार्यालयों में मॉनिटरिंग डिस्प्ले लगाए जा चुके हैं। शेष 2 मंडल (चित्रकूट, अयोध्या) और 3 जनपद (चित्रकूट, अयोध्या, सहारनपुर) में यह कार्य प्रक्रियाधीन है, जिसे एक सप्ताह के भीतर पूर्ण कर लिया जाएगा। इससे मंडल और जिला स्तर के अधिकारी भी संस्थाओं की स्थिति का प्रत्यक्ष और त्वरित अवलोकन कर सकेंगे।

मुख्यालय से प्रदेशभर की सीधी निगरानी
मुख्यालय स्थित एसडीएमसी अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं से सुसज्जित है। यहां 6 प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती की गई है, जो 3 शिफ्टों में 24×7 कार्य करते हुए यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी समय निगरानी व्यवस्था बाधित न हो। एसडीएमसी द्वारा नियमित रूप से इन बिंदुओं पर विशेष निगरानी की जाती है।

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• संस्थाओं में साफ-सफाई एवं स्वच्छता की वास्तविक स्थिति
• समस्त स्टाफ की उपस्थिति और ड्यूटी के प्रति उनकी नियमितता
• बच्चों के प्रति स्टाफ का व्यवहार, संवेदनशीलता और अनुशासन
• किचन में स्वच्छता, भोजन की तैयारी और गंदगी की संभावनाएं
• ड्यूटी के समय सुरक्षा गार्ड की सतर्कता, जागरूकता और निर्धारित स्थान पर उपस्थिति
• संस्था में निवासरत बच्चों की समुचित देख-रेख, सुरक्षा, रहन-सहन और सुव्यवस्थित वातावरण

अनियमितता पर त्वरित कार्रवाई
एसडीएमसी के माध्यम से यदि किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या मानकों के उल्लंघन की स्थिति सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना दी जाती है। इससे समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो रही है और जवाबदेही तय की जा रही है। महिला कल्याण विभाग की यह पहल उत्तर प्रदेश को महिला और बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक नई मिसाल बना रही है। तकनीक, संवेदनशीलता और सख्त निगरानी का यह मॉडल न केवल सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि प्रदेश में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। यह व्यवस्था आने वाले समय में सुशासन और मानवीय प्रशासन की पहचान बनने की पूरी क्षमता रखती है।

 

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