बदायूं में नाबालिग़ों के आरोप में जेल पहुंचीं माताएं, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

बदायूं। ज़िले के उसैहत थाना क्षेत्र में बीती 17 दिसंबर को हुई एक पुलिस कार्रवाई इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मामले में चार नाबालिग़ लड़कों पर एक नाबालिग़ छात्रा से छेड़छाड़ का आरोप लगा, लेकिन पुलिस ने बच्चों की जगह उनकी माताओं को गिरफ़्तार कर लिया। बाद में एसडीएम कोर्ट से चारों महिलाओं को उसी दिन ज़मानत मिल गई।

मामले के अनुसार, कक्षा आठ की छात्रा के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि गांव के चार नाबालिग़ लड़कों ने उनकी बेटी पर अश्लील टिप्पणियां कीं और छेड़छाड़ की। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज किया, लेकिन आरोपी बच्चे 13 साल से कम उम्र के होने के कारण हिरासत में नहीं लिए गए। इसके बजाय पुलिस ने उनके परिजनों को नोटिस जारी किए और बाद में चारों लड़कों की माताओं को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170 के तहत गिरफ़्तार कर लिया। 

विवाद तब बढ़ गया, जब तत्कालीन थाना प्रभारी अजय पाल सिंह ने मीडिया से कहा कि बच्चों को “अच्छे संस्कार नहीं मिले” और समाज को संदेश देने के लिए यह कार्रवाई ज़रूरी थी। इस बयान को क़ानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने क़ानून की भावना के ख़िलाफ़ बताया।

इस पूरे प्रकरण के बाद बदायूं के एसएसपी बृजेश सिंह के पीआरओ अश्विनी कुमार ने बताया कि शिकायतों की जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में थाना प्रभारी को लाइन हाज़िर कर दिया गया है। यह कार्रवाई मुरादाबाद के डीआईजी अजय साहनी की समीक्षा बैठक के बाद की गई। हालांकि, नाबालिग़ बच्चों की कथित हरकतों के लिए उनके माता-पिता को गिरफ़्तार किए जाने को लेकर पुलिस की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। इस घटना ने पुलिस की निवारक कार्रवाई और उसकी कानूनी सीमाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

 

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