बुंदेलखंड में ‘हर घर नल’ से बहती उम्मीद की धारा

हैंडपंपों में लगने वाली भीड़ से मिला छुटकारा, सामाजिक सुरक्षा भी बढ़ी

सिर्फ आधार कार्ड दिया और कनैक्शन हो गया, सार्वजनिक नल भी लगे

न्यूज़म ब्यूरो

लखनऊ, 8 फरवरी : बुंदेलखंड के लोगों के लिए यह किसी सपने से कम नहीं कि आज उन्हें उनके घर में ही पानी मिल रहा है। इस क्षेत्र में पानी की किल्लत से भुखमरी और गरीबी की जाने कितनी कहानियां हैं। सिर पर घड़ा रखकर दूरदराज से पानी लाती एक महिला की तस्वीर ही यहां के जिलों की पहचान बन गई थी। सालों साल तक यहां की महिलाओं ने पानी का संकट भुगता है। दूरदराज के कुंओं तक जाकर पानी खींचने के साथ ही हैंडपंप पर पानी के लिए लाइनें लगाई हैं। लेकिन अब यह सब अतीत की बातें हैं। अब सड़कों पर दूर से ही दिखनेवाली पानी की टंकियां उम्मीदों की जलधारा हैं।

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बात महोबा की करें तो यहां के लोगों ने पानी की किल्लत से लंबे समय तक दुर्दिन भरे दिन देखे हैं। कभी यहां वाटर ट्रेन से पानी पहुंचाने की नौबत आ गई थी। लोग घड़ा भर पानी के लिए जाने कहां-कहां तक भटकते थे। अब यहां दूर से ही दिखाई देने वाले वाटर टैंक नई कहानी कहते हैं। इस जिले में जल जीवन मिशन के तहत पांच परियोजनाओं के सहारे एक लाख 12 हजार से अधिक घरों को पाइपलाइन की कनेक्टिविटी दी जा चुकी है। हालांकि इसके लिए 1131 किलोमीटर सड़कों को क्षतिग्रस्त किया गया। क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के दौरान लोगों को थोड़ी परेशानी का सामना अवश्य करना पड़ा। महोबा के अरशद कहते हैं कि कोई योजना शुरू होने पर थोड़ी-बहुत परेशानी तो होती ही है। लेकिन, अब हर घर नल यहां के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है।

चित्रकूट में सिलौटा ग्राम मुस्तकिल समूह योजना की बात करें तो इससे जुड़े विकास खंड पहाड़ी, रामनगर और मानिकपुर में सवा लाख लोगों के लिए पानी की समस्या खत्म हो गई है। मानिकपुर के उन लोगों का दर्द महसूस कीजिए जो कभी लगभग एक किमी दूर से पानी लाया करते थे।…और इस समस्या की वजह से वहां लोग अपनी बेटियां ब्याहने को आसानी से तैयार नहीं होते थे। उनके लिए यह पानी जिंदगी है, बच्चों का भविष्य है। योजना के तहत पूरे क्षेत्र में 576 किमी की पाइप लाइन बिछाई जानी है, जिसमें 572 किमी बिछा दी गई है। 17 ओवरहेड टैंक हैं जहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से रोज पानी लाया जा रहा। यमुना नदी से पानी लाकर इस प्लांट में संशोधित करके टैंकों में चढ़ाकर लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा। बरहट की ग्राम प्रधान श्रीमती रज्जन देवी इस योजना का चर्चा करते हुए भावुक हो जाती हैं। कहती हैं कि हम योगी-मोदी सरकार के कृतज्ञ हैं कि उन्होंने हमारे बच्चों को बीमारियों से बचाने का इंतजाम कर दिया। हमारे बच्चे अब नहो-धोकर स्कूल जाते हैं। उनमें स्वच्छता का भाव स्वतः ही आने लगा है।

 

चित्रकूट में सिलौटा के साथ ही रैपुरा, चांदी बांगर ग्राम समूह पेयजल योजनाएं चल रही हैं और यह सारी योजनाएं उम्मीद की वह धारा हैं जिसके बारे में लोगों ने सोचा तक नहीं था। रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत 19570 परिवारों को नल से पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इन सभी घरों में नल लग गए हैं और 60 राजस्व ग्रामों में जलापूर्ति शुरू कर दी गई है। योजना के तहत आच्छादित मदना गांव के निवासी चुनबाद यादव बताते हैं कि हमारी बड़ी समस्या दूर हुई है। अपने लिए पानी का इंतजाम मुश्किल था, जानवरों की तो बात ही दूर। अब हमें परेशान नहीं होना पड़ रहा।

 

लोगों के लिए यह सिर्फ एक नल की बात हो सकती है लेकिन बुंदेलखंड के लिए यह वरदान है। यह वस्तुतः उस संकल्प की सिद्धि है, जिसे मोदी-योगी सरकार ने साधना के रूप में लिया। झांसी के बडा गांव, चिरगांव और बंगरा में अंतिम छोर के गांव तक जल जीवन मिशन की पाइप लाइन बिछ गई है। झासी जिले के बंगरा विकासखंड में स्थित गैरहा ग्राम पंचायत के 65 साल के कामता प्रसाद भावुक हो गए। बोले कि यह दिन देखने के लिए आंखें तरस गईं थीं। जिला मुख्यालय से दूर बसे इस गांव की विवाहिता शगुन बताती हैं कि उन्हें पहले गांव से आधा किमी दूर पानी लेना जाना पड़ता था और बारिश के समय बड़ी मुश्किल होती थी।
झांसी जिले के बंगरा ब्लाक की ग्राम पंचायत पचवारा में बहू बन कर जब रागिनी आईं तो उन्हें सरकारी हैंड पंप से पानी ले जाना पडता था। अब वे टोंटी खोलते हुए दिखाती हैं कि देखिये कितना साफ पानी है। गरीब परिवार की बहू खुश है कि मजदूरी करने वाले उनके पति मुकेश कुमार को एक पैसा तक नहीं देना पड़ा और नल का कनेक्शन हो गया। ग्राम पंचायत प्रधान अखिलेश रावत बताते हैं कि उनके गांव में एक हजार कनेक्शन हुए हैं।

दलित बाहुल्य गांव में योगी सरकार में बनाए गए आरोग्य मंदिर में भी जल जीवन मिशन के तहत नल लगा है, जहां मरीजों, तीमारदारों के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध है। सरकारी स्कूलों में भी बच्चे स्वच्छ पानी पी रहे हैं। जल जीवन मिशन के अधिशाषी अभियंता रणविजय सिंह बताते हैं कि इस स्कीम के तहत 42 गांव आच्छादित हैं और इन गांवों में 11 हजार 437 कनेक्शन हुए हैं।

बांदा का नाम आते ही सूखा, पानी की कमी और प्यास आदि शब्द अपने आप दिमाग में कौंधने लगते थे। अब यहां अमलीकौर पेयजल परियोजना और खटान पेयजल परियोजना से 544 गावों में पानी पहुंचा है। 82266 घरों में कनेक्शन किए जा चुके हैं। बड़ोखर खुर्द ब्लाक के बांधा पुरवा गांव के रहने वाले परदेशी ने बताया कि पहले हमें पानी के लिए पहले परेशान होना पड़ता था। वहीं अब हमको हमारे घरों में ही स्वच्छ पानी मिल रहा है। जल निगम के अधिशासी अभियंता विमल कुमार वर्मा ने बताया कि पाइपलाइन डालने के लिए जिन सड़कों को खोदा गया था। उनको भी ठीक कर दिया गया है। हमीरपुर में भी दो पेयजल परियोजनाएं चल रही हैं जहां 322 में से 320 गांवों में घरों तक नल से पानी पहुंचाया जा रहा है। यहां के लोगों की जिंदगी में यह योजना बहुत महत्वपूर्ण होने जा रही है।

 

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