शिक्षामित्रों को योगी मंत्र : प्यार से पढ़ाएं, मारपीट कभी नहीं, घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल लाएं

सीएम योगी ने बताया, कैसे पेश आएं बच्चों से 

बच्चों को अच्छी कहानियों, कविताओं और उत्कृष्ट उदाहरणों से प्रेरित कीजिए

बच्चे साफ-सुथरे कपड़ों में आएं, स्नान करके बाल बनाकर आएं, इसके लिए अभिभावकों को जागरूक करें

न्यूज़म ब्यूरो

गोरखपुर, 5 मई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षामित्र सम्मान समारोह में एक मार्गदर्शक की भूमिका में भी नजर आए। उन्होंने शिक्षामित्रों को बच्चों के साथ विशिष्ट व्यवहार का मंत्र भी दिया। सीएम ने कहा कि हर बच्चे के मन में पढ़ने की तमन्ना हो, यह अभिभावक, शिक्षक और समाज, तीनों की जिम्मेदारी है। शिक्षामित्र सिर्फ पढ़ाने तक सीमित न रहें, बल्कि हर बच्चे को स्कूल तक लाने का अभियान भी चलाएं। शिक्षक और शिक्षामित्र बच्चों की नींव तैयार करने वाले कारीगर हैं।

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मारपीट कभी नहीं, प्यार से समझाइए
शिक्षामित्रों से मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के साथ कभी मारपीट नहीं होनी चाहिए। पिटाई से बच्चा जिद्दी व ढीठ हो जाएगा। उसे प्यार से समझाइए। अच्छी कहानियों, कविताओं और आदर्श उदाहरणों से प्रेरित कीजिए। अपने परिवार की खींचतान स्कूल या बच्चों तक नहीं लाइए। स्कूल आते समय तनाव को घर पर ही छोड़ दीजिए।

जैसा पौधा रोपेंगे, वैसा फल मिलेगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर हम अच्छी पीढ़ी तैयार करेंगे, तो यही पीढ़ी हर क्षेत्र में अच्छे लोग लेकर आएगी। अच्छे शिक्षक, अच्छे डॉक्टर, ईमानदार व्यापारी, अच्छे किसान, योग्य नौकरशाह, अच्छी पुलिस और अच्छे राजनेता भी। राजनेता कोई ऊपर से टपककर नहीं आते। आप जिन बच्चों को पढ़ा रहे हैं, वही आगे चलकर राजनेता भी बनेंगे। इसलिए जैसा पौधा आप रोपेंगे, वैसा ही फल भी मिलेगा। हमें सकारात्मक भावना के साथ कार्य करना चाहिए। आप सब में बेहतर परिणाम देने की सामर्थ्य है। नकारात्मक सोच त्याग दें।

280 बच्चों वाला स्कूल देखकर अच्छा लगा
मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मुझे आज बहुत अच्छा लग रहा था। बेसिक शिक्षा परिषद के एक विद्यालय की प्रधानाचार्या से मैंने पूछा कि वहां कितने बच्चे हैं? उस विद्यालय में 280 बच्चे पढ़ रहे हैं। यह संख्या बताती है कि वहां कुछ अच्छा हो रहा है, सकारात्मक प्रयास हो रहा है। जब मैं सांसद था, तब भी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों का भ्रमण करता था और आज भी फील्ड में जाते समय विद्यालय अवश्य जाता हूं। बच्चों से संवाद करना मुझे बहुत अच्छा लगता है।

आंगनवाड़ी केंद्र की दिल छू लेने वाली कहानी
सीएम योगी ने एक रोचक प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि एक बार मैं एक आंगनवाड़ी केंद्र गया। वहां 3 से 5 साल के 20-22 बच्चे थे। मैं चुपचाप बाहर से देख रहा था। आंगनवाड़ी की बहनें बच्चों को बहुत प्यार से गाती हुई गिनती सिखा रही थीं- ‘एक-एक-एक मेरी नाक एक… दो-दो-दो मेरी आंखें दो’। बच्चे भी दोहरा रहे थे। जब वे अंदर गए तो बहनें हिचकिचाईं। जब मैंने एक बच्चे ने पूछा कि क्या पढ़ा तो उसने तुरंत कहा- “एक-एक-एक मेरी नाक एक” और दूसरे ने अपनी आंखें दिखाते हुए कहा- “दो-दो-दो मेरी आंखें दो”। देखिए, कितनी आसानी से उदाहरण देकर बच्चों को गिनती सिखाई जा रही थी। ऐसे अच्छे उदाहरणों से हम बच्चों को बहुत कुछ सिखा सकते हैं।

स्वच्छता, यूनिफॉर्म और अभिभावकों की जिम्मेदारी
सीएम ने शिक्षामित्रों को जिम्मेदारी सौंपी कि वे अभिभावकों को जागरूक करें। बच्चे साफ-सुथरे कपड़ों में आएं, स्नान करके आएं, बाल बनाकर आएं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि रविकिशन की नकल करने की जरूरत नहीं, छोटे-छोटे बाल होने चाहिए। 2017 से पहले 60-70% बच्चे नंगे पैर या चप्पल पहनकर आते थे। अब सरकार दो यूनिफॉर्म, स्वेटर, जूते-मोजे दे रही है, इसलिए अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

“स्कूल चलो” अभियान को और तेज करें
जुलाई के पहले सप्ताह में स्कूल खुलने वाले हैं, इसलिए मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों से अपील की कि “‘स्कूल चलो’ अभियान का एक और दौर चलाएं। शिक्षक आधा घंटा पहले स्कूल पहुंचें। 25-25 घरों में जाकर अभिभावकों से पूछें कि आपके घर में कितने बच्चे हैं? उन्हें स्कूल ले चलिए। स्कूल टाइम में कोई बच्चा तालाब में तैरता न मिले।

उन्होंने शिक्षकों और शिक्षामित्रों को खेलकूद में भी बच्चों के साथ भाग लेने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षित समाज होगा तो सशक्त समाज बनेगा और सशक्त राष्ट्र बनेगा। यहीं से विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत की नींव पड़ेगी।

 

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